भारत में डेयरी क्षेत्र की सफलता और “श्वेत क्रांति” की बात हो तो राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board – NDDB) का नाम सबसे पहले आता है। वर्ष 1965 में स्थापित यह संस्था किसानों के स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी समितियों को मजबूत बनाने, दूध उत्पादन बढ़ाने और आधुनिक डेयरी अवसंरचना विकसित करने के लिए कार्य कर रही है।
आज NDDB केवल ऑपरेशन फ्लड तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD), Dairy Infrastructure Development Fund (DIDF), Milk Producer Companies (MPC) तथा Farmer Producer Organisations (FPO) के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्य जानकारी
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| संस्था | राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) |
| अंग्रेजी नाम | National Dairy Development Board |
| स्थापना | जुलाई 1965 |
| संस्थापक | डॉ. वर्गीज़ कुरियन |
| मुख्यालय | आणंद, गुजरात |
| दर्जा | संसद के अधिनियम से स्थापित राष्ट्रीय महत्व की संस्था |
| प्रमुख उपलब्धि | ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति) |
| प्रमुख मॉडल | आणंद पैटर्न (Amul Model) |
| प्रमुख कार्यक्रम | NPDD, DIDF, MPC, FPO |
| आधिकारिक वेबसाइट | https://www.nddb.coop |
NDDB क्या है?
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) भारत सरकार की एक राष्ट्रीय महत्व की संस्था है, जिसका उद्देश्य किसानों के स्वामित्व वाली डेयरी सहकारी समितियों का विकास करना तथा डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाना है।
यह कोई प्रत्यक्ष सब्सिडी योजना नहीं है। NDDB किसानों को सीधे पैसा नहीं देती, बल्कि डेयरी सहकारी समितियों, डेयरी यूनियनों और उत्पादक संगठनों को तकनीकी, वित्तीय और प्रबंधन सहायता उपलब्ध कराती है।
NDDB की स्थापना क्यों की गई?
1960 के दशक में भारत दूध उत्पादन के मामले में आत्मनिर्भर नहीं था। किसानों को दूध का उचित मूल्य नहीं मिलता था और शहरों में दूध की भारी कमी थी।
गुजरात के आणंद मॉडल (Amul Model) की सफलता को पूरे देश में लागू करने के उद्देश्य से जुलाई 1965 में NDDB की स्थापना की गई।
मुख्य उद्देश्य थे:
• किसानों की आय बढ़ाना
• डेयरी सहकारी समितियों का गठन
• दूध उत्पादन बढ़ाना
• आधुनिक डेयरी अवसंरचना विकसित करना
• बिचौलियों की भूमिका कम करना
आणंद पैटर्न (Amul Model)
NDDB पूरे देश में जिस सहकारी मॉडल को बढ़ावा देता है उसे आणंद पैटर्न कहा जाता है।
पहला स्तर – ग्राम डेयरी सहकारी समिति
• किसान सीधे दूध बेचते हैं।
• दूध की गुणवत्ता की जांच होती है।
• किसानों को सीधे भुगतान मिलता है।
दूसरा स्तर – जिला दुग्ध संघ
• गांवों से दूध एकत्रित किया जाता है।
• प्रोसेसिंग और पैकेजिंग होती है।
• मार्केटिंग की जाती है।
तीसरा स्तर – राज्य डेयरी फेडरेशन
• राज्य स्तर पर ब्रांड संचालन
• बड़े स्तर पर विपणन
• नीति एवं प्रबंधन
यही मॉडल आगे चलकर अमूल जैसे सफल ब्रांड का आधार बना।
ऑपरेशन फ्लड (श्वेत क्रांति)
भारत में श्वेत क्रांति की शुरुआत 1970 में ऑपरेशन फ्लड कार्यक्रम से हुई।
यह कार्यक्रम तीन चरणों में लगभग 26 वर्षों तक चला और 1996 में इसका समापन हुआ।
इस कार्यक्रम की प्रमुख उपलब्धियां:
• लाखों दुग्ध उत्पादक किसानों को जोड़ा गया।
• हजारों डेयरी सहकारी समितियां बनीं।
• आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित हुए।
• भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना।
वर्तमान में NDDB क्या कार्य करता है?
आज NDDB कई राष्ट्रीय कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
• राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) का क्रियान्वयन
• Dairy Infrastructure Development Fund (DIDF)
• Milk Producer Companies (MPC) का गठन
• Farmer Producer Organisations (FPO) को सहयोग
• डेयरी अवसंरचना विकास
• कार्यशील पूंजी ऋण पर ब्याज सहायता
• पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम
• कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination)
• पशु उत्पादकता बढ़ाने की योजनाएं
किसानों को NDDB से क्या लाभ मिलता है?
NDDB से किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलता है।
• गांव की डेयरी सहकारी समिति के माध्यम से दूध की खरीद
• दूध का उचित मूल्य
• गुणवत्ता आधारित भुगतान
• तकनीकी सहायता
• प्रशिक्षण
• डेयरी व्यवसाय के लिए आधुनिक सुविधाएं
• नई डेयरी समितियों के गठन में सहयोग
नई डेयरी समिति कैसे बनाएं?
यदि किसी गांव में डेयरी सहकारी समिति नहीं है तो:
• राज्य दुग्ध संघ से संपर्क करें।
• राज्य डेयरी फेडरेशन से संपर्क करें।
• NDDB के क्षेत्रीय कार्यालय से सहायता लें।
• किसान समूह मिलकर Milk Producer Company या FPO बना सकते हैं।
NDDB से संबंधित प्रमुख योजनाएं
• राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
• Dairy Infrastructure Development Fund (DIDF)
• राष्ट्रीय डिजिटल पशुधन मिशन (NDLM)
• राष्ट्रीय गोकुल मिशन
• Farmer Producer Organisation (FPO)
• Milk Producer Company (MPC)
NDDB की प्रमुख उपलब्धियां
• भारत में श्वेत क्रांति का नेतृत्व
• ऑपरेशन फ्लड का सफल संचालन
• लाखों दुग्ध उत्पादकों को जोड़ना
• डेयरी सहकारी मॉडल का विस्तार
• आधुनिक डेयरी उद्योग का विकास
• ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा
• किसानों की आय में वृद्धि
किसानों के लिए महत्वपूर्ण बातें
• NDDB में व्यक्तिगत आवेदन करके नकद सहायता नहीं मिलती।
• लाभ गांव की डेयरी सहकारी समिति के माध्यम से मिलता है।
• किसान अपने राज्य की डेयरी यूनियन या सहकारी समिति से जुड़ सकते हैं।
• FPO और MPC बनाने वाले समूह NDDB से तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
NDDB क्या है?
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड भारत सरकार की राष्ट्रीय महत्व की संस्था है जो डेयरी सहकारी समितियों के विकास के लिए कार्य करती है।
NDDB की स्थापना कब हुई?
जुलाई 1965 में।
NDDB के संस्थापक कौन थे?
डॉ. वर्गीज़ कुरियन।
NDDB का मुख्यालय कहां है?
आणंद, गुजरात।
ऑपरेशन फ्लड क्या है?
1970 में शुरू किया गया राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम जिसने भारत में श्वेत क्रांति लाई।
क्या NDDB किसानों को सीधे पैसा देता है?
नहीं। किसानों को लाभ डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से मिलता है।
NDDB किन योजनाओं पर कार्य करता है?
• NPDD
• DIDF
• MPC
• FPO
• डेयरी विकास परियोजनाएं
अमूल और NDDB में क्या संबंध है?
अमूल एक स्वतंत्र डेयरी सहकारी संस्था है। NDDB ने अमूल के आणंद मॉडल को पूरे देश में विस्तार दिया।
NDDB की आधिकारिक वेबसाइट क्या है?
आधिकारिक स्रोत
• राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) – https://www.nddb.coop
• डेयरी सेवाएं – https://www.nddb.coop/services
• राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)
• डेयरी इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (DIDF)
सूचना
| विवरण |
|---|
| यह लेख राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) से संबंधित आधिकारिक जानकारी एवं उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों के आधार पर तैयार किया गया है। नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट अवश्य देखें। |





