Ethanol as Cooking Fuel Policy: भारत में पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने (Ethanol Blending) की बड़ी सफलता के बाद अब केंद्र सरकार एक और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। बहुत जल्द आपकी रसोई में एलपीजी (LPG सिलेंडर) की जगह एथेनॉल से चलने वाले चूल्हे नजर आ सकते हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum and Natural Gas) एक नई नीति पर काम कर रहा है, जिसके तहत एथेनॉल को खाना पकाने के मुख्य ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस नई योजना को सितंबर 2026 तक अंतिम रूप दे सकती है। इस नीति के तहत आम जनता को एथेनॉल वाले चूल्हे खरीदने के लिए सरकार की तरफ से सब्सिडी (Financial Support) भी दी जाएगी।
रसोई में एथेनॉल के इस्तेमाल से क्या होगा फायदा?
एथेनॉल एक पर्यावरण अनुकूल (Eco-Friendly) ईंधन है, जो गन्ने, अनाज और शर्करा (Sugar) वाली फसलों से तैयार किया जाता है। रसोई में इसके इस्तेमाल से कई बड़े फायदे होंगे:
- महंगे LPG आयात से मुक्ति: भारत को एलपीजी के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। एथेनॉल के आने से यह निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत: देश का पैसा बाहर जाने से बचेगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कुकिंग और एथेनॉल अपनाने से साल 2050 तक सरकार के 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो सकती है।
- सुरक्षित ईंधन: वैश्विक तनाव या युद्ध जैसी स्थितियों में भी देश के भीतर ईंधन की सप्लाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
भारत के पास है एथेनॉल का बंपर स्टॉक
आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत में एथेनॉल की कोई कमी नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि देश में एथेनॉल का उत्पादन बहुत तेजी से बढ़ रहा है:
| एथेनॉल के आंकड़े (भारत) | क्षमता / उपयोग |
| कुल सालाना उत्पादन क्षमता | 20 अरब लीटर से अधिक |
| E20 पेट्रोल में उपयोग | लगभग 11 अरब लीटर |
| फार्मा और अन्य उद्योगों में उपयोग | 3 से 3.5 अरब लीटर |
| सालाना अतिरिक्त (सरप्लस) स्टॉक | लगभग 7 अरब लीटर |
यह जो 7 अरब लीटर अतिरिक्त एथेनॉल हर साल बच जाता है, सरकार अब इसी का इस्तेमाल हमारे घरों की रसोई में ईंधन के रूप में करने की तैयारी कर रही है। भविष्य में भारत इसका निर्यात नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों को भी कर सकता है।
कैसे काम करेगी यह नई योजना?
सरकार इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है:
- एथेनॉल स्टोव (Ethanol Stove): सरकारी तेल कंपनियां ऐसे खास चूल्हों पर रिसर्च कर रही हैं जो सुरक्षित तरीके से एथेनॉल पर चल सकें। इनका ट्रायल भी शुरू हो चुका है।
- पेट्रोल पंपों पर एथेनॉल ATM: जैसे आप दूध के एटीएम या पेट्रोल पंप से तेल लेते हैं, वैसे ही पेट्रोल पंपों पर ‘एथेनॉल एटीएम’ लगाए जाएंगे। लोग वहां जाकर अपनी जरूरत के हिसाब से गैलन में एथेनॉल खरीद सकेंगे।
- सब्सिडी का लाभ: शुरुआत में एथेनॉल वाले चूल्हों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ग्राहकों को आर्थिक मदद (सब्सिडी) देगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपना सकें।
निष्कर्ष: सरकार की यह नई नीति न केवल आम जनता की जेब का खर्च कम करेगी, बल्कि पर्यावरण को बचाने और भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।





